राजस्थान पंचायत-निकाय चुनाव: डोटासरा का भजनलाल सरकार पर आरक्षण खत्म करने का आरोप | Rajasthan Politics

राजस्थान में आगामी पंचायती राज और नगर निकाय चुनावों में ओबीसी (OBC), एससी (SC) और एसटी (ST) वर्ग के आरक्षण को लेकर बड़ा सियासी विवाद खड़ा हो गया है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए भजनलाल सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। डोटासरा ने इसे भारतीय जनता पार्टी (BJP) और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) का बड़ा षड्यंत्र करार देते हुए कहा कि सरकार इन वर्गों का आरक्षण कम करके उनके साथ नाइंसाफी कर रही है।

कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने अपनी प्रेस कांफ्रेंस के दौरान कुछ आंकड़े मीडिया के सामने रखें और बताया कि ST, SC, OBC को वास्तविक संख्या के अनुसार उनको आरक्षण नहीं दिया गया है।

50% सीमा के बावजूद 40% से भी कम रखा गया आरक्षण

डोटासरा ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के अनुसार नौकरियों में 50% आरक्षण का कैप (सीमा) है, हालांकि राजनीति में ऐसी सीमा नहीं होनी चाहिए। फिर भी अगर सुप्रीम कोर्ट के फैसले को मान लिया जाए, तो एससी, एसटी और ओबीसी का कुल आरक्षण 50% तक होना चाहिए। लेकिन भजनलाल सरकार ने अधिकांश जगह इसे 40% से भी कम कर दिया है।

उन्होंने कई जिलों के उदाहरण देते हुए बताया कि एससी, एसटी और ओबीसी तीनों का कुल आरक्षण 50% तक नहीं पहुँच रहा है:

  • अजमेर: कुल 39.39%
  • बालोतरा: 41.93%
  • बाड़मेर: 43.24%
  • ब्यावर: मात्र 33.33% (जबकि ब्यावर में केवल ओबीसी की जनसंख्या ही 78% है, फिर भी न्यूनतम 21% आरक्षण भी नहीं दिया गया)
  • चूरू: 46.75%
  • डीग: 34.8% (यहाँ ओबीसी की जनसंख्या 72.73% है, लेकिन आरक्षण सिर्फ 20.79% दिया गया)
  • धौलपुर: 51.26% ओबीसी जनसंख्या होने के बावजूद आरक्षण सिर्फ 20.69% दिया गया।
  • डीडवाना-कुचामन: 42.85%
  • जैसलमेर: 38%
  • झुंझुनू: 39%
  • खैरथल तिजारा: 36%
  • कोटपूतली बहरोड़: 37%
  • फलौदी: 39.13%
  • सीकर: 40.81%

आंकड़ों में बड़ा घालमेल और मनमाना प्रतिशत

डोटासरा ने सरकार की जनगणना और जन-आधार के आंकड़ों पर भी सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि एक ही जिले के ग्रामीण क्षेत्र में पंचायत समिति और जिला परिषद की जनसंख्या समान होनी चाहिए, लेकिन सरकार के आंकड़ों में भारी अंतर है। उदाहरण के लिए, अजमेर पंचायत समिति में जन-आधार के अनुसार 9,19,295 आबादी बताई गई है, जबकि जिला परिषद के आंकड़ों में इसे 8,76,000 बताया गया है।

इसके अलावा, सरकार ने बिना किसी तार्किक आधार के कई जिलों में एक समान आरक्षण प्रतिशत तय कर दिया है:

  • अलवर, चित्तौड़गढ़, दौसा, करौली, और श्रीगंगानगर में ओबीसी का अलग-अलग प्रतिशत होने के बावजूद सभी को एक समान 9.09% आरक्षण दिया गया।
  • डीडवाना-कुचामन, पाली, फलौदी, और राजसमंद में सभी जगह एकमुश्त 11.11% आरक्षण थमा दिया गया।

जिला परिषद और पंचायत समितियों में ओबीसी के सैकड़ों वार्ड किए गए कम

डोटासरा ने स्पष्ट आंकड़े देते हुए बताया कि किस तरह ओबीसी के वार्डों की संख्या में बड़ी कटौती की गई है:

  • जिला परिषद: प्रदेश की 41 जिला परिषदों में 1403 वार्ड हैं। 21% के हिसाब से ओबीसी के 294 वार्ड होने चाहिए थे, लेकिन केवल 192 वार्ड (13.68%) ही आरक्षित किए गए। यानी ओबीसी के 102 वार्ड कम कर दिए गए
  • पंचायत समिति: 457 पंचायत समितियों में कुल 8245 वार्ड हैं। 21% के हिसाब से 1731 वार्ड होने चाहिए थे, लेकिन सरकार ने केवल 1101 वार्ड (13.35%) आरक्षित किए। यहाँ ओबीसी के 630 वार्ड कम कर दिए गए हैं।
  • जिला प्रमुख पद: 41 जिला प्रमुखों में से 50% कैप के बावजूद ओबीसी के लिए 9 सीटें बननी चाहिए थीं, लेकिन सिर्फ 5 सीटें (12%) दी गई हैं।
  • नगर निकाय: स्थानीय निकायों में 309 में से एसटी (ST) वर्ग को केवल 9 सीटें दी गई हैं, जो कि उनके साथ बड़ी बेईमानी है।

विधानसभा में चर्चा से क्यों भागी सरकार?

कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष ने सवाल उठाया कि जब 20 अगस्त से राजस्थान विधानसभा का सत्र शुरू हो रहा है, तो सरकार ने ओबीसी आरक्षण की रिपोर्ट पटल पर क्यों नहीं रखी? आनन-फानन में 5 दिन पहले ही बिना जनप्रतिनिधियों से चर्चा किए इसे कैबिनेट से पास कर दिया गया। उन्होंने कहा कि 2019 में बने राजस्थान के ओबीसी आयोग के सर्वे (जिसमें ओबीसी 52% हैं) की अनदेखी करके, भाजपा अपनी “सुपारी” वाली रिपोर्ट के जरिए ओबीसी का आरक्षण 13-14% में निपटाना चाहती है।

भ्रष्टाचार, प्रशासनिक नियुक्तियों और पेपर लीक पर हमला

आरक्षण के अलावा डोटासरा ने राज्य सरकार के कामकाज पर भी जमकर निशाना साधा:

  • भ्रष्टाचार: उन्होंने आरोप लगाया कि आज पट्टा जारी करने, सफाई कर्मी और चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी की भर्ती बिना पैसे के नहीं हो रही है। मंत्री किरोड़ी लाल मीणा खुद अधिकारियों (कलेक्टरों) को चोर बता रहे हैं।
  • अधिकारियों की तैनाती में मनमानी: RAS अधिकारियों की पोस्टिंग का उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया कि 2021 बैच का जूनियर अधिकारी 2002 बैच के सीनियर अधिकारी का बॉस बन बैठा है। एससी, एसटी और ओबीसी वर्ग के अधिकारियों की अनदेखी की जा रही है।
  • पेपर लीक: परीक्षाओं में हो रही सामूहिक नकल और धांधली पर सरकार अपनी जिम्मेदारी से भाग रही है और कांग्रेस पर अनर्गल आरोप लगा रही है।

कांग्रेस की रणनीति और आंदोलन की चेतावनी

डोटासरा ने स्पष्ट किया कि कांग्रेस ने अपने 200 विधानसभा कोऑर्डिनेटरों से रिपोर्ट ले ली है और 17-18 अगस्त को वरिष्ठ नेताओं व प्रभारियों के साथ मिलकर आगामी नगर निकाय चुनाव की रणनीति बनाई जाएगी।

अंत में उन्होंने चेतावनी दी कि भाजपा और आरएसएस की इस साजिश के खिलाफ एससी, एसटी और ओबीसी वर्ग के लोग सड़कों पर उतरेंगे। डोटासरा ने दावा किया कि जनता में इस सरकार और इसके भ्रष्टाचार के खिलाफ भारी आक्रोश है, जिसके कारण आने वाले नगर निकाय और पंचायत चुनावों में भारतीय जनता पार्टी का सूपड़ा साफ हो जाएगा।

(नोट: यह आर्टिकल दिए गए यूट्यूब वीडियो में कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा द्वारा साझा किए गए आंकड़ों और उनके बयानों पर आधारित है।)

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